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सरकार समान नागरिक संहिता कानून को लागू करने से होने वाले फायदों

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यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) का मतलब है, भारत में रहने वाले हर नागरिक के लिए एक समान कानून होना, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति का क्यों न हो. यानी हर धर्म, जाति, लिंग के लिए एक जैसा कानून. अगर सिविल कोड लागू होता है तो विवाह, तलाक, बच्चा गोद लेना और संपत्ति के बंटवारे जैसे विषयों में सभी नागरिकों के लिए एक जैसे नियम होंगे.
अगर UCC आता है, तो हिंदू विवाह अधिनियम (1955), हिंदू उत्तराधिकार अधिनियम (1956) जैसे मौजूदा कानूनों को संशोधित करना होगा. उदाहरण के लिए, हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 2(2) कहती है कि इसके प्रावधान अनुसूचित जनजातियों पर लागू नहीं होंगे.
समान नागरिक संहिता लागू होने के बाद हिन्दु मैरिज एक्ट में बदलाव कर पाना नामुमकिन हो जाएगा इसलिए सरकार को ने सभी राज्यों में रहने वाले पुरुष व महिलाओं से राय मांगी है कि समान नागरिक संहिता आपकी समाज व संस्कृति के लिए नुकसानदायक तो नहीं है अगर है तो आप अपने सुझाव दें और ये बताएं इसमें क्या बदलाव किया जाए वो भी लिख कर भेज सकते हैं इसका पता चलते ही
महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत के प्रधान धज्जाराम ने इस विषय को लेकर महम हल्के की पंचायत बुलाई और सरकार द्वारा समान नागरिक संहिता कानून के लागु होने हमारे समाज और संस्कृति पर इसका क्या कुप्रभाव पड़ेगा और हम सरकार क्या सुझाव व विकल्प भेजें ताकि हमारा समाज एक रहे इस पंचायत में महम चौबीसी के अनेक गांवों व तापों से बुद्धिजीवी बुजुर्गों एवं युवा जिनमें
भीम बहलम्बा तपा प्रधान, दिनेश शर्मा खरकड़ा, चौबीसी सर्वखाप पंचायत पर्वक्ता काला बहलबा,धज्जाराम चौबीसी सर्वखाप पंचायत प्रधान , चांदराम राठी निदाना, बलबीर राठी लाखनमाजरा,भीम सरपंच, सतपाल सरपंच बलमवा, कुलदीप राठी सरपंच से बहलम्बा,हनु राठी, संजय राठी, नफे सिंह, आजाद, सलाहकार हरिओम सिवाच, के इलावा सैकड़ों बुद्धिजीवी लोगों ने भाग लिया और अपनी अपनी राय दी
सभी लोगों ने हिन्दू मैरिज एक्ट में सरकार द्वारा कुछ संसोधन करने को लेकर प्रस्ताव पास किया गया
पंचायत में फैसला लिया गया कि इन सुझावों को सरकार के पास भेजा जाए ताकि इनको संसोधन करने वाले देश के अन्य राज्यों से आए सुझावों में शामिल किया जा सके पंचायत ने फैसला किया कि हिंदू विवाह अधिनियम 1955 की धारा 5 के तहत निम्नलिखित सुझाव को अपराध की श्रेणी में डाला जाए इसमें पंचायत ने 9 प्रस्ताव पास किए जिसके अनुसार पहला प्रस्ताव 1सम गोत्र विवाह नहीं होना चाहिए 2 गांव की गांव में शादी
3 गांव के सिमान्त गांव में 4 शादी की उम्र यथावत रखी जाए
5 विवाहित महिला व पुरुष की लिव-इन रिलेशनशिप
6 दो से ज्यादा संतान का होना
7 बहू विवाह
8 लिंग के आधार पर भेदभाव
9 शादी रजिस्ट्रेशन अनिवार्य हो लड़का लड़की के माता-पिता के हस्ताक्षर अनिवार्य हो
महम चौबीसी सर्वखाप पंचायत ने इन सुझावों को भेजते वक्त पत्रकारों से बातचीत में कहा कि सरकार से हमारी प्रार्थना है कि इन सुझावों को अपराध की श्रेणी में डाला जाए ताकि वर्तमान समय समाज में युवाओं द्वारा नासमझी की वजह से की जा रही गलतियां कानून के भय से रूक सकें पंचायत के प्रवक्ता काला बलम्भा ने बताया कि समाज में इन बुराइयों की वजह से समाज के हालात बद से बद्तर होते जा रहे हैं उन्होंने कहा कि युवाओं की इन गलतियों का खामियाजा उनके बुजुर्ग माता-पिता को भुगतना पड़ रहा है उन्होंने पत्रकारों के माध्यम से सरकार अनुरोध किया कि हिंदू मैरिज एक्ट को भारतीय संस्कृति के अनुसार ही रखना चाहिए ताकि समाज को विघटन से बचाया जा सके

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